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बिहार का वो ठग जो घर वालों की नजर में था सिनेमा का सितारा, प्रभाव दिखाने के लिए फाड़ देता था नोटों की गड्डी, रांची पुलिस ने ऐसे दबोचा

मुजफ्फरपुर : झारखंड की रांची साइबर थाने की पुलिस ने क्रिप्टो करेंसी के माध्यम से अमीर बनने का सपना दिखाकर लोगों को ठगने वाले शशि शंकर कुमार उर्फ विक्की को ब्रह्रपुरा थानाक्षेत्र के त्रिलोकी नाथ मंदिर गली स्थित घर से गिरफ्तार किया। इसने क्रिप्टो करेंसी से निवेश कर 300 प्रतिशत मुनाफा के लालच में सैकड़ों लोगों को फंसाया था।
रांची साइबर पुलिस ने छापेमारी के दौरान इसके पास से एक मोबाइल, दो सिमकार्ड, चार चेकबुक, एक पासबुक और एक वाईफाई राउटर को जब्त किया है। रांची पुलिस इसे ट्रांजिट रिमांड पर लेकर रांची पहुंच गई है। बोकारो के चास थानाक्षेत्र के आदर्श नगर के रहने वाले संतोष कुमार ने 9 नवंबर 2023 को इसके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें शशि शंकर के अलावा दिल्ली के जनकपुरी के रहने वाले अमित कुमार जायसवाल को भी आरोपी बनाया गया था।
ठग गिरोह का मास्टरमाइंड शशि शंकर उर्फ विक्की ने अपने घर वालों और मोहल्ले वालों को जानकारी दी थी कि वो फिल्म इंडस्ट्री में काम करता है और उसी सिलसिले में ज्यादा समय विदेश में रहता है। अपने काम के सिलसिले में ही वो दुबई और रूस जाता है। जब भी वो घर आता था तो फ्लाइट से ही आता था और परिचितों के बीच अपने काम को लेकर व्यस्तता जताता था। पिछले सात महीनों से वो घर से ही नेटवर्क चला रहा था और घर के अंदर के एक कमरें में ऑफिस बना रखा था। उसने अपने कमरे में जाने की किसी को इजाजत नहीं दी थी। विक्की के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि उसका लैपटॉप हमेशा ऑन रहता था और उसमें ग्राफ जैसा दिखाई देता था, लेकिन इस बारे में वो किसी को कोई जानकारी नहीं देता था।

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shashi shankar vikki
300 प्रतिशत मुनाफा देने का वादा कर ऐसे फंसाता था विक्की
क्रिप्टो करेंसी में निवेश कर 17 माह में लगाई गई राशि को 300 प्रतिशत अधिक मुनाफा देने का वादा करता था विक्की। रूपये इन्वेस्ट करने के बाद चेन मार्केटिंग के तर्ज पर जाल में फंसे लोगों से उनके परिचितों और रिश्तेदारों का पैसा लगवाता था। उसके बाद जिस साइट के माध्यम से पैसा कमाता था उसे बंद कर फरार हो जाता था। शशि शंकर और अमित जायसवाल ने झारखंड के रांची, बोकारो, जमशेदपुर जैसे कई शहरों में बड़े बड़े आयोजन किये। बड़े बड़े होटलों में ये oropay कंपनी से संबंधित कार्यक्रम को करता था लोगों को मुफ्त में खाना पिलाने का इंतजाम कर अपने प्रभाव को दिखाता था। यही नहीं ये शातिर ठग भारतीय करेंसी के फर्जी नोटों की गड्डी को फांड़कर ये दिखाने की कोशिश करता था कि ये भूतकाल की मुद्राएं रह गई है भविष्य तो क्रिप्टो करेंसी का है। जब लोगों का निवेश इसकी oropay कंपनी  में बढ़ गया तो निवेशकों का पैसा लेकर ये फरार हो गया।
जब www.oropay.io.in  वेबसाइट बंद हो गया तो उसने उन लोगों के संपर्क को कम करके कुछ के साथ खत्म करके अन्य वेबसाइट के माध्यम से ठगी का काम करने लगा। वो अब इस तरह के सभी मीटिंग को जूम एप के माध्यम से करने लगा था। उसने अपने साथ गोपाल प्रजापति, प्रथा सारथी धार, हर्षित प्रसाद, रंजीत कुमार मंडल, राजेश ताना भगत, विनोद सत्यार्थी, राजेश कुमार सिंह, संजय कुमार पासवान, राजेंद्र महतो, इंद्रजीत मुखर्जी और जितेंद्र कुमार यादव समेत दर्जनों लोगों को जोड़ा ये सभी लोग क्रिप्टो करेंसी एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड स्कीम में पैसा लगाया था. इसके बाद वह जितनों को जोड़ा था वह नए लोगों को जोड़ने लगा. जुलाई 2021 में ओरोपे ने डीजीएफआइ नाम से एक टोकन लांच किया. इसके बाद दोनों आरोपितों ने जूम के माध्यम से मीटिंग कर इसे पब्लिक में भी बेचने की बात कही. उसने कहा कि इसको बिटक्वाइन के तर्ज पर बढ़ाना है।कुछ इस तरह से ये ठग अपने नेटवर्क को आगे बढ़ा रहा था लेकिन ये आखिरकार रांची पुलिस के हथ्थे चढ़ गया।

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