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हेमंत सोरेन ने जब खुद को दो कमरों में कर लिया था सीमित, कल्पना ने लिखा संघर्ष और त्याग को लेकर भावनात्मक पोस्ट

रांची : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के संघर्ष और त्याग को लेकर उनकी पत्नी कल्पना सोरेन ने एक भावनात्मक पोस्ट हेमंत सोरेन के सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर लिखा। पूर्व मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी को एक महीना पूरा होने पर उन्होने कोरोना काल के उन तीन-चार महीनों के दौरान अपने परिवार और सरकार को लेकर हेमंत सोरेन के जुड़ाव और संघर्ष की कहानी लिखी है।
उन्होने अपने पोस्ट में लिखा है कि कोरोना का समय था और सभी ओर भय का माहौल।

जब भारत सरकार ने पूरे देश को लॉकडाउन लगाकर बंद करने का फ़ैसला लिया तो झारखण्ड की ज़िम्मेदारी संभालते हुए हेमन्त जी को 2 महीने ही हुए थे।

उनके सामने ना सिर्फ़ राज्य में रह रहे लोगों की फ़िक्र थी, बल्कि अन्य राज्यों से आ रहे प्रवासी श्रमिक भाइयों-बहनों, बच्चों-बुजुर्गों तथा अन्य राज्यों में रह रहे झारखण्डियों तक मदद पहुँचाने की भी ज़िम्मेदारी थी। वे हर रोज़, सुबह से देर रात तक अधिकारियों से व्यवस्था की जानकरी लेते हुए उन्हें ज़रूरी दिशा-निर्देश देने के बाद, कभी-कभी अहले सुबह 4 बजे तक जरूरी फाइलें निपटाया करते थे।

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कोरोना के पहले चरण के उन 3-4 महीनों में मैंने और बच्चों ने शायद ही हेमन्त जी के साथ इत्मीनान से एक दिन भी बिताया होगा। उन्होंने हमें सुरक्षित रखने के लिए ख़ुद को आवास के बाहरी हिस्से में बने 2 कमरों में सीमित कर लिया था। ऐसा कोई दिन नहीं था जब वे लोगों के हितों, उनके जीवन और जीविका के संरक्षण के लिए कार्य नहीं कर रहे थे, उनके बीच मौजूद नहीं थे।

उनकी सबसे बड़ी चुनौती इस महामारी के बीच भाजपा द्वारा फैलाया जा रहे साम्प्रदायिक उन्माद को रोकना था और साथ ही लॉकडाउन में आजीविका के अभाव में किसी राज्यवासी की भूख से मौत न हो जाए, यह भी सुनिश्चित करना था।

एक तरफ़ भाजपा के बड़े-बड़े नेता घर बैठ गये थे एवं ख़ुद को सिर्फ़ सोशल मीडिया एवं चिट्ठियों/पत्रों तक उन्होंने सीमित कर लिया था, वहीं हेमन्त जी और झामुमो तथा गठबंधन सरकार का हर जन-प्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता राज्यवासियों के बीच था। इस महामारी में हमने लोगों की सेवा करते हुए अपने 2 जुझारू नेताओं समेत कई लोगों को खोया था। हाजी साहब और टाइगर जगरनाथ महतो जी ने सच्चे झारखण्डी की तरह अपने प्राणों की आहुति देकर जनता की सेवा की थी।

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राज्य में हजारों दीदी किचन की मदद से पूरे राज्य में भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई थी। पूर्व की सरकार में जहां राज्य के माथे पर भूख से कई मौतों का कलंक लगा वहीं कोरोना जैसी विकट महामारी में हेमंत जी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने लाखों लोगों के जीवन और जीविका का विशेष ध्यान रखा। हेमन्त जी हमेशा कहते रहे हैं कि गांव-पंचायत, शहरों में अपने परिवार की परवाह किये बगैर झारखण्ड की हमारी दीदी-बहनों ने लोगों को भोजन खिलाकर राज्य की एक बहुत बड़ी सेवा की है।

हेमन्त जी, झामुमो एवं गठबंधन सरकार के सभी लोगों के इस संवेदन और संघर्षशीलता ने पूरे देश को दिखाया है कि व्यक्तिगत कठिनाइयों के बावजूद कैसे राज्यवासियों की सेवा की जानी चाहिए।

हेमन्त जी ने हमेशा संघर्ष से लड़ना सीखा है, उसके सामने झुकना नहीं।

जय जोहार!🏹
जय झारखण्ड!

#झारखण्ड_झुकेगा_नहीं

~कल्पना मुर्मू सोरेन

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